ओं जय जगदीश हरे
स्वामि जय जगदीश हरे
भक्त जनोँ के सङ्कट
दास जनोँ के सङ्कट
क्षण मे दूर् करे
ओं जय जगदीश हरे ॥

जो ध्यावे फल् पावे
दुख् बिनसे मन् का
स्वामि दुख् बिनसे मन् का
सुख सम्पति घर् आवे
सुख सम्पति घर् आवे
कष्ट मिटे तन् का
ओं जय जगदीश हरे ॥